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Showing posts from November, 2021

जगद्गुरु  शंकराचार्य निश्चालानंद सरस्वती परिचय

श्रीगोवर्धनमठ पुरी के वर्तमान १४५वें जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद जी महाराज भारत के एक ऐसे युग पुरुष है , जिनसे आधुनिक युग के सर्वोच्च वैधानिक संगठनो संयुक्त राष्ट्र संघ और विश्व बैंक तक ने मार्गदर्शन प्राप्त किया है ! संयुक्त राष्ट्र संघ ने दिनांक २८ से ३१ अगस्त २००० में न्यूयार्क में आयोजित विश्वशांति शिखर सम्मलेन तथा विश्व बैंक ने वर्ल्ड फेथ्स डेवलपमेंट डाइलोग – २००० के वाशिंगटन सम्मलेन के अवसर पर लिखित मार्गदर्शन प्राप्त किया था ! श्री गोवर्धन मठ से सम्बंधित स्वस्तिप्रकाशन द्वारा इसे क्रमशः “विश्वशांति का सनातन सिद्धांत “ तथा “सुखमय जीवन का सनातन सिद्धांत “ शीर्षक से सन २००० में पुस्तक रूप में प्रकाशित किया ! इसके अलावा विश्व के २०० देश चिन्हित किये गए है , जिनके वैज्ञानिको ने कंप्यूटर व् मोबाइल फोन से लेकर अंतरिक्ष तक के क्षेत्र में किये गए आधुनिक अविष्कारों में उन वैदिक गणितीय सिद्धांतो का प्रयोग किया है जो पूज्यपाद जगद्गुरू शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंदसरस्वतीजी महाराज द्वारा रचित “ स्वस्तिक गणित “ नामक पुस्तक में दिए गए है , शंकराचार्य महाराज जी के अन्य ग्रन्थ “ अंकप...

संघ परिवार/भाजपा क्यों जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी से चिढ़ते हैं और उन्हें बदनाम करते हैं आइए जानते हैं।

मित्रों आप जानते हैं संघ परिवार जिसमें विश्व हिंदू परिषद और बीजेपी भी है वह क्यों जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी से चिढ़ते हैं और उन्हें बदनाम करते हैं आइए जानते हैं। : अनंत श्री विभूषित वरिष्ठ दंडी संन्यासी जगतगुरु शंकराचार्य ज्योतिष एवं शारदा द्वारिका पीठाधीश्वर स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी महाराज वह पहले व्यक्ति हैं जो 1950 में बने रामराज्य परिषद के प्रथम अध्यक्ष थे और अपनी अध्यक्षता में रामराज्य परिषद के माध्यम से उन्होंने जो चुनावी घोषणा पत्र दी उसमे पहली बार यह कहा गया कि वह चुनाव जीतने पर राम जन्मभूमि अयोध्या, कृष्ण जन्मभूमि मथुरा और काशी विश्वनाथ का पुनरुद्धार करेंगे तब तो विश्वहिन्दू परिषद बना भी नही था। सन 1983-84 में राम जन्मभूमि का का ताला भी राजीव गांधी ने इनके कहने पर ही खुलवाया था। राम जन्मभूमि पुनरुद्धार समिति नामक संस्था के माध्यम से जगतगुरु, राम मन्दिर के लिए 5 मूल पक्षकारों में से एक प्रमुख पक्षकार के रूप में कोर्ट में 1989 में प्रस्तुत हुए। इनके वरिष्ठ वकील पीएन मिश्रा ने इनके द्वारा दिए गए प्रमाणों के आधार पर हाई कोर्ट इलाहाबाद में यह सिद्ध कर दिया...

VHP द्वारा आयोजित धर्मसंसद अधिवेशन का प्रयोजन एवं परिणाम-एक विश्लेषण

VHP द्वारा आयोजित धर्मसंसद अधिवेशन का प्रयोजन एवं परिणाम-एक विश्लेषण ◆जुलाई 2018 (चातुर्मास) में शंकराचार्य स्वरूपानंदजी ने परम धर्मसंसद बुलाने की घोषणा की क्योंकि देश में बहुत ऐसे मुद्दे थे जो सनातन धर्म के विरुद्ध और भारतीय संस्कृति को पतित करने वाले है। जिस पर समय समय पर शंकराचार्यजी ने विरोध किया है। वाराणसी में 26,27,28 नवम्बर त्रिदिवसीय तथा 28,29,30 जनवरी प्रयाग में अर्ध कुम्भ पर्व पर परम धर्म संसद बुलाने का निर्णय हुआ। ●जैसे ही इस परम धर्मसंसद का शंखनाद सुनाई दिया और संत समाज तथा वैदिक विद्वानों में इनकी गूंज हुई तो VHP ने भी आयोध्या 25-11-18 धर्म संसद बुलाने की घोषणा की। यदि कोई वैदिक सनातन धर्मी या सन्त समाज धर्म संसद बुलाए तो कोई आपत्ति है ही नही। माध्यम कोई भी रहे शंकराचार्यजी या vhp , बात तो धर्मविचारणा की है। फिर भी धर्मद्रोहियों ने शंकराचार्यजी, जो सनातन हिन्दू धर्मके सर्वोच्च धर्मगुरु है उनके विरुद्ध में अनर्गल प्रलाप आरम्भ किया। परमधर्मसंसद ने विश्वके सभी religion, मजहब, cult, तथा सनातन धर्म के सभी सम्प्रदायों को इस परम धर्म संसद में आमंत्रित किया । भारतके सभी राज...

शंकराचार्य के विषय मे झुठ फैलाने वाले धिक्कार पात्र है

मैं जैसे-जैसे जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी महाराज के बारे में अध्ययन कर रहा हूं। मुझे भारत के नागरिकों पर तरस आ रहा है हमारे देश के नागरिक सदैव से मूर्खता वाला काम किए हैं सच्चे व्यक्ति का को बदनाम करना और छद्म धोखे बाजो का सम्मान करना ही इनका काम रहा है इसीलिए ये हमेशा से दुखी रहे हैं प्रताड़ित रहे हैं और छले गए हैं। जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी एक ऐसे शंकराचार्य हैं जो 18 साल की उम्र में भारत छोड़ो आन्दोलन में दो बार 1942 में जेल जा चुके हैं। एक बार 6 महीने के लिए और एक बार 9 महीने के लिए जहां 18 साल की उम्र में आजकल का आधुनिक बच्चा यदि 1 दिन के लिए भी जेल चला जाए तो पेंट गीली कर देगा। मम्मी मम्मी करके रोता रहेगा वही उन दिनों क्रांतिकारियों के मध्य "क्रांतिकारी युवा साधु" के नाम से प्रसिद्ध श्री पोथीराम उपाध्याय जो लगभग 18 साल की आयु में ही 6 महीना और फिर दोबारा 9 महीने के लिए 1942 में जेल जाते हैं। गांधी जी के भारत छोड़ो आंदोलन में इतने सक्रिय हुए थे कि अंग्रेजों ने 18 साल के इस बालक को दो बार जेल में डालना आवश्यक समझा वह भी दो-चार दि...

राममन्दिर के मामले में ज्योतिष पीठाधीश्वर होने के नाते जगद्गुरू शंकराचार्य स्वामी श्री स्वरुपानंद सरस्वती जी महाराज अब तक कहाँ थें ?

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★इसे प्रत्येक निष्पक्ष हिन्दू पढ़े और आपके शंकराचार्य जी ने राम मन्दिर के लिए क्या किया इसे समझे। यदि आप एक सच्चे सनातन धर्मी हैं तो अपने आचार्य का अपमान करने वालों के खिलाफ एकजुट हों। प्रश्न:- राममन्दिर के मामले में ज्योतिष पीठाधीश्वर होने के नाते जगद्गुरू शंकराचार्य स्वामी श्री स्वरुपानंद सरस्वती जी महाराज अब तक कहाँ थें ? क्योंकि उत्तर भारत उत्तराम्नाय ज्योतिष पीठ के क्षेत्राधिकार में आता है और धर्मसत्ता के सर्वोच्च शासक धर्मसम्राट होने के नाते ज्योतिषपीठाधीश्वर का दायित्व है कि वो राम मन्दिर के लिए सबसे अधिक कार्य करें? उत्तर:- ★★ पिछले 70 वर्षों से लेकर अबतक अनन्त श्री विभूषित ज्योतिष एवं द्वारकाशारदा पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी महाराज क्या क्या करते आये अयोध्या श्रीराम मन्दिर के लिए और दूसरे ने क्या क्या किया उसे हर हिन्दू को पढ़ना चाहिए★★ ●1948 में धर्मसम्राट स्वामी करपात्री जी महाराज ने कांग्रेस के खिलाफ अखिल भारतीय राम राज्य परिषद बनायी जिसका प्रथम अध्यक्ष अपने विश्वासपात्र प्रिय गुरुभाई स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी महाराज को बनाया और 1952 के ...

राम मन्दिर शिलान्यास यह बात बहुत कम लोगों को पता होगी पूरी पढ़ें

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★★यह बात बहुत कम लोगों को पता होगी पूरी पढ़ें।★★ ★★अयोध्या में #9_नवम्बर_1989 में राम मन्दिर शिलान्यास के मामले में किस प्रकार #राजीव_गाँधी के नेतृत्व वाली कांग्रेस ने दिसम्बर 1989 के लोकसभा चुनाव में वोट पाने के लालच में #विश्व_हिंदू_परिषद् के साथ मिलकर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी महाराज एवं हिन्दू धर्म के साथ गद्दारी किया और किस प्रकार राजीव गांधी 1989 में बुरी तरह चुनाव हार गए और फिर कभी प्रधानमंत्री नही बन सकें और आज तक उनके पत्नी और बच्चे किस प्रकार उन्ही संघी भाजपाइयों द्वारा गाली खा रहे हैं जिनके साथ मिलकर राजीव गाँधी ने शंकराचार्य जी के साथ षड़यन्त्र किया? यह हम सबको पढ़ना चाहिए।★★ यहाँ 4 पक्ष हैं। 1.मूल सनातन धर्म के सर्वोच्च आचार्य धर्मसत्ता के सम्राट ज्योतिष् एवं द्वारका शारदा पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी महाराज 2. अधार्मिक अवैदिक राजसत्ता के शासक प्रधानमंत्री राजीव गाँधी, गृहमंत्री बूटा सिंह, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री एन डी तिवारी(पूरी केंद्र और राज्य की कांग्रेस सरकार) 3. तत्कालीन राज सत्ता और सनातन धर्म सत्ता दोनों का विर...

शंकराचार्य जी को ट्रस्ट में नही लिया इसलिए ये राम मन्दिर का विरोध कर रहे हैं????

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★★इनको ट्रस्ट में नही लिया इसलिए ये राम मन्दिर का विरोध कर रहे हैं:- ब्रेनवाश किया गया एक कार्यकर्ता ★★ #सच्चाई:- ये क्या ट्रस्ट में शामिल करेंगे? ये तो अध्यक्ष बनने का प्रस्ताव लाये थे जिसे शंकराचार्य जी ने स्वयं ठुकरा दिया। #पढिये_पूरी_रिपोर्ट जब धर्मसत्ता के सर्वोच्च शासक पूज्यपाद जगद्गुरुदेव भगवान् सनातनधर्म सिद्धान्तों के आधार पर यह कहते हैं कि अयोध्या में राम का मन्दिर नही बल्कि संघ, विश्व हिंदू परिषद् का कार्यालय बन रहा है तो एक आम संघ भाजपा कार्यकर्ता कहता है कि सरकार ने इनको ट्रस्ट में शामिल नही किया इसलिए ये ट्रस्ट का विरोध करते हैं। जबकि इसके उलट #सच्चाई क्या है? आइए देखते हैं। जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी महाराज इन #वर्णाश्रम_विरोधी #राम #कृष्ण आदि देवताओं को मनुष्य मानने वाले संघ के साथ अपने पूरे जीवन काल मे कभी साथ नही आये तो आज वैदिक धर्म विरोधी, पैसे की लूट करने वाले ट्रस्ट में कैसे शामिल हो जाते? आपको बता दें कि शंकराचार्य जी राम मंदिर के लिए तब से आवाज लगा रहे हैं जबसे ये पूज्यपाद धर्मसम्राट स्वामी करपात्री जी महाराज द्वारा 1948 में बनाये गए #अख...

क्या धर्मत्याग (धर्मांतरण) के दोषी शंकराचार्य हैं?

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★★क्या धर्मत्याग (धर्मांतरण) के दोषी शंकराचार्य हैं?★★ ★★आखिर क्यों कुछ लोग सनातन वैदिक धर्म छोड़ कर ईसाई या मुसलमान बन जाते हैं?★★ यदि आप निष्पक्ष होकर सच्चाई जानना चाहते हैं तो कृपया पूरा लेख अवश्य पढ़ें और स्वयं निर्णय करें। संघ के स्वयंसेवक भी एक बार पढ़ ही लें तो अच्छा होगा। हा धीरे धीरे पढ़े और विचार करें अन्यथा समझ मे नही आएगा। आज धर्मांतरण को लेकर आरएसएस भाजपा के स्वयंसेवक कार्यकर्ता उनकी, आई टी सेल के लोग बड़ी चालाकी से अपने नेताओं के द्वारा किये जा रहे अधर्म, कुकर्म, जनता के साथ धोखे को छुपाने के लिए धर्मांतरण के लिए वर्तमान पूज्य शंकराचार्यों एवं उनकी परम्परा को दोषी ठहरा रहे हैं शंकराचार्यों को गाली दे और दिलवा रहे हैं। हिंदुत्व के नाम पर चुनी सरकार हिन्दुओं के सबसे बड़े धर्माचार्यों के अपमान पर चुपचाप तमाशा देख रही है क्योंकि यह उनके एजेंडे के अनुसार ही हो रहा है। यह किसी से छुपा नही है हम सब सोशल मीडिया पर देख रहे हैं। अब बात आती है कि कोई हिन्दू अपना धर्म छोड़कर ईसाई या मुसलमान क्यों बन रहा है ? इसके दो कारण हैं। 1. भय 2. लालच अभी हाल में ही 1000 हिन्दुओं का स्वधर्मत्याग करा ...