शंकराचार्य जी को ट्रस्ट में नही लिया इसलिए ये राम मन्दिर का विरोध कर रहे हैं????

★★इनको ट्रस्ट में नही लिया इसलिए ये राम मन्दिर का विरोध कर रहे हैं:- ब्रेनवाश किया गया एक कार्यकर्ता ★★ #सच्चाई:- ये क्या
ट्रस्ट में शामिल करेंगे? ये तो अध्यक्ष बनने का प्रस्ताव लाये थे जिसे शंकराचार्य जी ने स्वयं ठुकरा दिया। #पढिये_पूरी_रिपोर्ट जब धर्मसत्ता के सर्वोच्च शासक पूज्यपाद जगद्गुरुदेव भगवान् सनातनधर्म सिद्धान्तों के आधार पर यह कहते हैं कि अयोध्या में राम का मन्दिर नही बल्कि संघ, विश्व हिंदू परिषद् का कार्यालय बन रहा है तो एक आम संघ भाजपा कार्यकर्ता कहता है कि सरकार ने इनको ट्रस्ट में शामिल नही किया इसलिए ये ट्रस्ट का विरोध करते हैं। जबकि इसके उलट #सच्चाई क्या है? आइए देखते हैं। जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी महाराज इन #वर्णाश्रम_विरोधी #राम #कृष्ण आदि देवताओं को मनुष्य मानने वाले संघ के साथ अपने पूरे जीवन काल मे कभी साथ नही आये तो आज वैदिक धर्म विरोधी, पैसे की लूट करने वाले ट्रस्ट में कैसे शामिल हो जाते? आपको बता दें कि शंकराचार्य जी राम मंदिर के लिए तब से आवाज लगा रहे हैं जबसे ये पूज्यपाद धर्मसम्राट स्वामी करपात्री जी महाराज द्वारा 1948 में बनाये गए #अखिल_भारतीय_रामराज्य_परिषद् के प्रथम अध्यक्ष बने थें। यहाँ तक का तो हमें इतिहास मिलता है बाकी उसके पूर्व में भी शंकराचार्य जी अवश्य ही राम मंदिर के मुक्ति के लिए सोचते होंगे। 1949 में अयोध्या में कौशल्या के गोद मे रामलला की मूर्ति प्रकटाने में धर्मसम्राट स्वामी करपात्री जी के साथ स्वामी स्वरूपानंद जी का विशेष योगदान है जिसका लिखित इतिहास आपको नही मिलेगा और न हम कभी उस रहस्य को लिखेंगे जो हमने गुरुदेव के मुख से सुना है कि 22-23 दिसम्बर 1949 की रात को क्या हुआ था? 1989 में आधिकारिक रूप से न्यायालय में शास्त्र सम्मत श्रीराम चंद्र जी का पक्ष रखने के लिए #अखिल_भारतीय_श्रीराम_जन्मभूमि_पुनरुद्धार_समिति बनाकर कोर्ट में #मुख्य_पक्षकार बने। और इन्ही के दिए प्रमाणों के कारण विवादित भूमि #श्रीरामजन्मभूमि सिद्ध हो पायी। 3 अप्रैल 1993 में नरसिम्हाराव को बोलकर राम मन्दिर के लिए 67 एकड़ भूमि अधिग्रहण करवाया। 27 जून 1993 में श्रृंगेरी में #चतुष्पीठ_सम्मेलन करके अयोध्या में राम मन्दिर बनाने के लिए आचार्यों का एक रामालय न्यास बनाने का मार्ग प्रशस्त करवाया। ◆बाकी राम जी के लिए 70 वर्षों में किये कार्यों का विस्तृत वर्णन मैंने पूर्व के एक लेख में कर ही दिया है। अतः बहुत विस्तार देने की आवश्यकता नही है। मेरा तो एकमात्र उद्देश्य संघ भाजपा के झूठे आरोपों का उत्तर देना है।◆ ये जो नीचे छवियाँ देख रहे हो । इसमे तुम्हारे एक राष्ट्रीय नेता रामलाल भी है। ये वही संघी रामलाल है जो संघ कोटे से भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव और संसदीय समिति के 6 सदस्यों में से एक प्रमुख सदस्य पद पर रहते हुए फरवरी 2019 में अपनी भतीजी श्रेया गुप्ता का निकाह कट्टर कांग्रेसी मुस्लिम फैजान करीम से कर दिया था। इस निकाह में उत्तर प्रदेश के राज्यपाल, उपमुख्यमंत्री, केंद्र और राज्य सरकार के बहुत से केबिनेट मंत्री, सांसद, विधायक, भाजपा पार्टी नेता, संघ के प्रचारक आदि बिरयानी खाने और इस जोड़े को आशीर्वाद देने आए थें। और तब तुमलोग बड़ी बेशर्मी से इस संघी प्रयोग को वैदिक निकाह सिद्ध करने पर तुले हुए थे जैसे आज चम्पत राय गैंग का भूमि घोटाले में बचाव कर रहे हो। अपनी भतीजी का निकाह एक मुस्लिम से कराने के कारण पदोन्नति देकर संघ ने इन्हें वापस संघ में बुलाकर इन्हें अखिल भारतीय स्तर का अधिकारी बना दिया। ये भाई साहब #22_फरवरी_2020 को, पूज्यपाद शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी महाराज को मनाने गए थें और शंकराचार्य जी के जबलपुर आश्रम से होते हुए झोतेश्वर परमहंसी तक शंकराचार्य के शिष्यों की पादुका पूजन करते गए थे जिससे शंकराचार्य जी को प्रसन्न कर सकें। शंकराचार्य जी के पास मोदी और मोहन भागवत का संदेश लेकर गए थे कि आप ट्रस्ट का विरोध न करके उसे आशीर्वाद दे दीजिए आपको संघ श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का अध्यक्ष बनाना चाहता है। ◆पता है शंकराचार्य जी ने क्या कहा? शंकराचार्य जी ने साफ साफ कहा कि तुम दूत बनकर आये हो तुम्हे हमारा आशीर्वाद है पर जाकर कह देना मोहन भागवत और नरेंद्र मोदी से हम आचार्य हैं और हमारी समस्त शीर्ष आचार्यों का रामालय न्यास पहले से बना हुआ है। हम राजनेताओं के झुण्ड में सम्मिलित होकर अपनी मर्यादा नष्ट नही होने देते। ●हम इस ट्रस्ट को स्वीकार नही करेंगे क्योंकि इसमें सब अयोग्य अधर्मी, राम को भगवान् न मानने वाले,मन्दिरों को तोड़ने वाले, राम के नाम पर धन लूटने वाले लोग भरे हैं। ●जाकर कह देना कि तुमलोग अभी राम की महिमा जान नही पाए हो। तुमलोग कभी मन्दिर बना नही पाओगे क्योंकि तुम्हारा चरित्र मन्दिर बनाने का है ही नही। ●तुम्हे तो यह भी नही पता है कि मन्दिर और मंदिरनुमा भवन में क्या अंतर है? ●भगवान् की प्राणप्रतिष्ठित मूर्ति और एक सामान्य मूर्ति में क्या अन्तर है? ●तुमलोग शास्त्र मर्यादा के विपरीत मन्दिर बनाने का ढोंग करके जनता को मूर्ख बना सकते हो पर मुझे नही। जाकर कह देना मोहन भागवत और नरेंद्र मोदी से तुमलोग अपना भला चाहते हो तो इस ट्रस्ट को भंग करके सनातन धर्म के समस्त शीर्ष आचार्यों की संस्था #अयोध्या_श्रीरामजन्मभूमि_रामालय_न्यास को मन्दिर बनाने का अधिकार दो अन्यथा जिस राम का नाम लेकर तुमलोग सत्ता के शीर्ष पर पहुँचे हो उसी राम के कारण तुमलोग सत्ता से सदैव के लिए नष्ट हो जाओगे। आज तुम्हारी सरकार है तो तुम मनमानी कर रहे हो पर यह मन्दिर का विवाद तबतक समाप्त नही होगा जबतक इसमे से सत्ता के भूखे राजनैतिक लोग हट नही जाते और #परब्रह्म_परमात्मा_मर्यादा_पुरुषोत्तम_भगवान्_श्रीरामचन्द्र अपने मन्दिर में शास्त्र सम्मत विधा से स्थापित नही हो जाते। रामलाल ने शंकराचार्य जी का प्रसाद लेकर भोजन पानी खा पी कर आश्रम घूमफिर कर चले गए। अब संघियों बताओ कि जिस शंकराचार्य ने स्वयं इस ट्रस्ट का अध्यक्ष बनने से मना कर दिया हो उनके विरोध का कारण तुम ये समझते हो कि इन्हें ट्रस्ट में नही लिया गया इसलिए ये ट्रस्ट के विरोधी हैं। अरे तुम अभी शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी को जान कहाँ पाए हो? जाकर देखो इंटरनेट की दुनिया मे तमाम फ़ोटो मिल जाएंगे जिसमे तुम्हारे भाजपा विश्व हिंदू परिषद् आरएसएस के अनेक राष्ट्रीय नेता लोग शंकराचार्य जी की पादुका पूजन करते हैं और अपने माथे को इनके चरणों मे रखते हैं। जैसे शिव सभी दुष्टों को आशीर्वाद दे देतें हैं उसी प्रकार शंकराचार्य जी के शरण मे आ जाने वाले सभी को आशीर्वाद मिल जाता है। संघियों को पता है कि आशीर्वाद लेते रहो अन्यथा कब काल निपटा देगा पता भी नही चलेगा। खैर आज 98 वर्ष की आयु है तब भी क्रांतिकारी हैं और 12 वर्ष की आयु थी तब देश की आजादी के लिए घर छोड़ दिया था परिणाम यह हुआ कि 17 वर्ष के होते होते इन क्रांतिकारी साधु ने अंग्रेजो के नाक में इतना दम कर दिया था कि इन्हें 6 महीना वाराणसी और 9 महीना मध्यप्रदेश के जेल में अंग्रेजो को डालना पड़ा। और तुमलोगों सोचते हो कि तुम इस विराट महामानव को हरा लोगे? अरे ये साक्षात धर्मराज हैं और धर्म कभी हारता नही है। अब दुबारा मत कहना कि ट्रस्ट में नही लिया इसलिए विरोध कर रहे हैं बल्कि तुम्हारे ट्रस्ट को इन्होंने तुम्हारे निवेदन करने पर भी स्वीकार नही किया। क्योंकि ये तुम धूर्तों का चरित्र अच्छे से जानते हैं। नोट:-1. गुरु घण्टाल गोलवरकर की अंग्रेजी पुस्तक "बंच ऑफ थॉट्स" के हिन्दी अनुवाद विचार नवनीत के अध्याय विजय के उपासक में गोलवरकर ने साफ साफ लिखा है कि राम और कृष्ण देवता नही थें मात्र मनुष्य थें। इनके अच्छे काम को देखते हुए कायर लोगों ने इन्हें देवता कोटि में ढकेल दिया। गोलवरकर के विचारों की धज्जियाँ पूज्यपाद धर्मसम्राट स्वामी करपात्री जी महाराज ने #राष्ट्रीय_स्वयंसेवक_संघ_और_हिन्दू_धर्म नामक पुस्तक लिख उड़ा दिए जिसका जवाब आजतक कोई संघी बुद्धिजीवी नही दे पाया। अब आपलोग ही बताइए कि राम कृष्ण को भगवान् न मानने वाले चले हैं राम का मंदिर बनाने। 2. रामालय न्यास में में कुल 25 सदस्य हैं और सनातन धर्म के सभी परम्परा प्राप्त सम्प्रदायों के शीर्ष आचार्य सम्मिलित किये गए हैं जिनका नाम आप चित्र में देख सकतें हैं। 3. लेख कॉपी करने वाले मुझ लेखक के नाम सहित सभी चित्रों को भी पोस्ट करें। 4. प्रामाणिक लेख पढ़ने के लिए फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजें अपने मित्रों को भी हमसे जोड़ें। धर्म की जय हो अधर्म का नाश हो जगद्गुरु शंकराचार्य भगवान् की जय हो ✍️दीपक कुमार केशरी #सनातनी

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