संघ परिवार/भाजपा क्यों जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी से चिढ़ते हैं और उन्हें बदनाम करते हैं आइए जानते हैं।
मित्रों आप जानते हैं संघ परिवार जिसमें विश्व हिंदू परिषद और बीजेपी भी है वह क्यों जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी से चिढ़ते हैं और उन्हें बदनाम करते हैं आइए जानते हैं।
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अनंत श्री विभूषित वरिष्ठ दंडी संन्यासी जगतगुरु शंकराचार्य ज्योतिष एवं शारदा द्वारिका पीठाधीश्वर स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी महाराज वह पहले व्यक्ति हैं जो 1950 में बने रामराज्य परिषद के प्रथम अध्यक्ष थे और अपनी अध्यक्षता में रामराज्य परिषद के माध्यम से उन्होंने जो चुनावी घोषणा पत्र दी उसमे पहली बार यह कहा गया कि वह चुनाव जीतने पर राम जन्मभूमि अयोध्या, कृष्ण जन्मभूमि मथुरा और काशी विश्वनाथ का पुनरुद्धार करेंगे तब तो विश्वहिन्दू परिषद बना भी नही था।
सन 1983-84 में राम जन्मभूमि का का ताला भी राजीव गांधी ने इनके कहने पर ही खुलवाया था।
राम जन्मभूमि पुनरुद्धार समिति नामक संस्था के माध्यम से जगतगुरु, राम मन्दिर के लिए 5 मूल पक्षकारों में से एक प्रमुख पक्षकार के रूप में कोर्ट में 1989 में प्रस्तुत हुए।
इनके वरिष्ठ वकील पीएन मिश्रा ने इनके द्वारा दिए गए प्रमाणों के आधार पर हाई कोर्ट इलाहाबाद में यह सिद्ध कर दिया की वह विवादित ढांचा मस्जिद नहीं बल्कि मंदिर ही था क्योकि मीरबांकी और बाबर कभी अयोध्या आये ही नही और लगातार लगभग 90 दिन चले बहस में 24 दिन तक केवल राम जन्मभूमि पुनरुद्धार समिति की ओर से जगत गुरु के ही वकील पी एन मिश्र ने बहस की और सबसे अधिक प्रमाण इन्होंने इस कोर्ट के सामने प्रस्तुत किया जिसके आधार पर यह फैसला आया कि विवादित ढाँचा मन्दिर ही था अतः इनके वजह से ही हम केस जीत पाए थे क्योंकि बाकी पक्षकारों ने ये मान लिया था कि मीर बाँकी ने वहाँ मस्जिद बना दिया था अतः वह मस्जिद ही था, चुकी मसलमानों का कहना था कि बाबर बादशाह था इएलिये एक बादशाह के रूप में उसने जो कुछ किया वो सही ही था क्योंकि बादशाह जो करता है या जो कहता है वही कानून होता है। पर जब जगद्गुरु के वकील ने बहस की तो उन्होंने ये सिद्ध किया कि इतिहास में 3 मीर बाँकी का जिक्र है पर 3 में से कोई कभी अयोध्या गया ही नही थाऔर न स्वयं बाबर ही गया था। इसी आधार पर केस हिन्दुओ के पक्ष में मजबूती से गया था अन्यथा हिन्दू केस हारने वाला ही था। r.s.s. बीजेपी या विश्व हिंदू परिषद या उनके संगठन राम जन्मभूमि न्यास तो कोर्ट में आज तक अपना पक्ष रखी ही नहीं है। इन्होंने कोर्ट में एक पन्ने का दस्तावेज नही रखा है राम मन्दिर के पक्ष में। यह तो केवल वोट बैंक बनाने के लिए भीड़ इकट्ठा करके कार सेवा करने के नाम पर ढोंग किए और भोली भाली हिंदु जनता को मूर्ख बना कर उनको मरवा दिए और उनके लाशों पर सहानुभूति बटोर कर फिर सत्ता में आये थे। मुझे कोई बीजेपी,संघ या विश्व हिन्दू परिषद का कार्यकर्ता बताएं कि विश्व हिंदू परिषद या उनका राम जन्मभूमि न्यास कोर्ट में कहाँ पक्षकार बना?
यह लोग जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी महाराज जो कि एक सिद्ध महापुरुषों और दंडी स्वामी है उनके प्रति अनर्गल बातें करते हैं उनको इसलिए बदनाम करने का प्रयास करते हैं जिससे कि कहीं हिंदुओं का जो समर्थन उनको मिलता है जिसके सहारे वह सत्ता का सुख भोगते रहते हैं वह कहीं समाप्त हो न जाए इसलिए वह बिना प्रमाण के जगतगुरु को बदनाम करते रहते हैं उनको गालियां देते रहते हैं जबकि जगतगुरु 1950 से ही जब से वह दंड सन्यास की दीक्षा लिये थे तब से ही राम जन्म भूमि के लिए निरंतर कार्य कर रहे हैं इसके पहले वह स्वतंत्रता सेनानी भी रह चुके हैं मैं शीघ्र ही उनके जीवनी के ऊपर प्रमाण सहित लिखूंगा।
1992 में विश्व हिंदू परिषद ने राम मंदिर का शिलान्यास मूल गर्भगृह स्थान से 192 फीट दूर कर दिया था जो कि शास्त्र विरुद्ध था और जब जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी महाराज ने इस बात का खुलासा किया कि विश्व हिंदू परिषद ने जो शिलान्यास किया है वह शास्त्र विरुद्ध है गलत मुहूर्त में किया गया है और मूल स्थान से 192 फीट दूर किया गया है अतः इस प्रकार से वह शिलान्यास सिद्ध नहीं होता जब बार-बार मीडिया में प्रचार हुई और जगत गुरु के वक्तव्य का देश की जनता समर्थन करने लग गई तब विश्व हिंदू परिषद की पोल खुल गई और उस समय तब ये झूठ बोल दिए और कहने लग गए कि नहीं नहीं राम मंदिर का नहीं अपितु सिंह द्वार का शिलान्यास किया है पर यहा इनका झूठ फिर पकड़ा गया क्योंकि शास्त्र के अनुसार सबसे पहले मंदिर के गर्भगृह का ही शिलान्यास होता है ना कि सिंह द्वार का अतः इस तरह से जब इनकी सच्चाई जनता के सामने 1992 में आ गई तब से यह झूठ प्रचार करने लग गए कि यह जगतगुरु कांग्रेसी हैं और वो उनको मन्दिर बनाने में रुकावट पैदा कर रहे हैं। तब से इनका चिढ़ आज तक चलता आ रहा है।
मैं बहुत शीघ्र ही सारी सच्चाई एक एक करके लिखूंगा और यह सिद्ध कर लूंगा कि वास्तव में यह कालनेमि संघ विश्व हिंदू परिषद वाले उसी तरह से ही हैं जिस तरह से हम सनातन धर्मावलंबियों के लिए आर्य समाज बौद्ध जैन इत्यादि मत वाले हैं जो शास्त्र विरुद्ध हैं। हम इन्हें नहीं मानते उसी प्रकार आर एस एस के जो मत है वह आर्य समाज का ही मत है जिसे हम नहीं मानते हैं इसलिए शंकराचार्य परंपरा जो कि शुद्ध सनातन वैदिक धर्म को मानती है उनसे सदैव ही इन संघियों का विरोध रहता है इसलिए कभी भी कोई भी असली शंकराचार्य इनकी विचारधारा को समर्थन नहीं करता क्योंकि शंकराचार्य परंपरा वही परम्परा है जो इस देश को बौद्धों से मुक्त कराया था। बौद्धों के मूर्खता वाले विचारधारा से आजाद करा के आद्य जगतगुरु आचार्य शंकर ने सनातन धर्म की पुनर्स्थापना की थी अतः हमारा मलेक्षों से सदैव ही विरोध रहेगा चाहे वह संघ हो चाहे आर्य समाज हो या चाहे कोई भी विचारधारा हो,जो शास्त्र विरुद्ध होगा हम उसका विरोध करते रहेंगे। जगत गुर तो राम जी के लिए जेल तक जा चुके हैं। बस शंकराचार्य जी काम करने से मतलब रखते हैं न कि संघ, बीजेपी की तरह पब्लिक को बरगला कर झूठ बोल कर के दूसरे के द्वारा किए हुए कार्य का क्रेडिट लेकर के वोट बैंक तैयार करके सत्ता सुख भोगते हैं। बीजेपी के सत्ता सुख में शंकराचार्य जी उसे शत्रु लग रहे हैं क्योंकि शंकराचार्य जी उसकी सच्चाई बता रहे हैं हिंदुओं को इसलिए बीजेपी टूट पड़ी है शंकराचार्य जी को अपमानित करने के लिए पर हम लोग अपने शंकराचार्य जी के साथ हैं ।
जगतगुरु शंकराचार्य भगवान की जय
हर हर महादेव
अद्भुत आदरणीय श्री
ReplyDeleteबहुत ही सुंदर सच्चाई को सामने रखा गया है।
ReplyDeleteVery good
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