शंकराचार्य के विषय मे झुठ फैलाने वाले धिक्कार पात्र है
मैं जैसे-जैसे जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी महाराज के बारे में अध्ययन कर रहा हूं। मुझे भारत के नागरिकों पर तरस आ रहा है
हमारे देश के नागरिक सदैव से मूर्खता वाला काम किए हैं सच्चे व्यक्ति का को बदनाम करना और छद्म धोखे बाजो का सम्मान करना ही इनका काम रहा है इसीलिए ये हमेशा से दुखी रहे हैं प्रताड़ित रहे हैं और छले गए हैं। जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी एक ऐसे शंकराचार्य हैं जो 18 साल की उम्र में भारत छोड़ो आन्दोलन में दो बार 1942 में जेल जा चुके हैं। एक बार 6 महीने के लिए और एक बार 9 महीने के लिए
जहां 18 साल की उम्र में आजकल का आधुनिक बच्चा यदि 1 दिन के लिए भी जेल चला जाए तो पेंट गीली कर देगा। मम्मी मम्मी करके रोता रहेगा वही उन दिनों क्रांतिकारियों के मध्य "क्रांतिकारी युवा साधु" के नाम से प्रसिद्ध श्री पोथीराम उपाध्याय जो लगभग 18 साल की आयु में ही 6 महीना और फिर दोबारा 9 महीने के लिए 1942 में जेल जाते हैं। गांधी जी के भारत छोड़ो आंदोलन में इतने सक्रिय हुए थे कि अंग्रेजों ने 18 साल के इस बालक को दो बार जेल में डालना आवश्यक समझा वह भी दो-चार दिन के लिए नहीं एक बार 6 महीने के लिए तो दूसरी बार 9 महीने के लिए जो व्यक्ति देश के लिए इतनी कम उम्र से जागरूक रहा हो जिसके अंदर देश प्रेम की भावना उड़ेल रही हो, जो ज्योतिष पीठ के पूर्व शंकरचार्य का शिष्य रहें हो और जो राम मन्दिर के लिए भी जेल गए हो,
राम मन्दिर बनाने के लिए जिन्होंने देश भर में अनेको सभायें की हो। उस 96 वर्ष के बुजुर्ग व्यक्ति को आज के कुछ घटिया लोग गंदे मानसिकता के लोग राजनीतिक पार्टियों के दिहाड़ी मजदूर अपमानित करते है।
हैं मुझे शर्म आती है ऐसे लोगों पर जो अपने आप को हिंदुत्ववादी कहते हैं और अपने पूज्य जगद्गुरु शंकराचार्य का अपमान करते हैं। डूब मरो डूब मरो l
लोगों का कुछ नही हो सकता।
टुकड़ो पे पलने वाले मूर्ख हिन्दुओ गुलाम थे गुलाम हो और आगे भी रहोगे। पहले अंग्रेजो के गुलाम आज राजनैतिक पार्टियों के गुलाम हो कल फिर किसी न किसी के गुलाम रहोगे।
राम
#सनातनी
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