VHP द्वारा आयोजित धर्मसंसद अधिवेशन का प्रयोजन एवं परिणाम-एक विश्लेषण

VHP द्वारा आयोजित धर्मसंसद अधिवेशन का प्रयोजन एवं परिणाम-एक विश्लेषण ◆जुलाई 2018 (चातुर्मास) में शंकराचार्य स्वरूपानंदजी ने परम धर्मसंसद बुलाने की घोषणा की क्योंकि देश में बहुत ऐसे मुद्दे थे जो सनातन धर्म के विरुद्ध और भारतीय संस्कृति को पतित करने वाले है। जिस पर समय समय पर शंकराचार्यजी ने विरोध किया है। वाराणसी में 26,27,28 नवम्बर त्रिदिवसीय तथा 28,29,30 जनवरी प्रयाग में अर्ध कुम्भ पर्व पर परम धर्म संसद बुलाने का निर्णय हुआ। ●जैसे ही इस परम धर्मसंसद का शंखनाद सुनाई दिया और संत समाज तथा वैदिक विद्वानों में इनकी गूंज हुई तो VHP ने भी आयोध्या 25-11-18 धर्म संसद बुलाने की घोषणा की। यदि कोई वैदिक सनातन धर्मी या सन्त समाज धर्म संसद बुलाए तो कोई आपत्ति है ही नही। माध्यम कोई भी रहे शंकराचार्यजी या vhp , बात तो धर्मविचारणा की है। फिर भी धर्मद्रोहियों ने शंकराचार्यजी, जो सनातन हिन्दू धर्मके सर्वोच्च धर्मगुरु है उनके विरुद्ध में अनर्गल प्रलाप आरम्भ किया। परमधर्मसंसद ने विश्वके सभी religion, मजहब, cult, तथा सनातन धर्म के सभी सम्प्रदायों को इस परम धर्म संसद में आमंत्रित किया । भारतके सभी राजनैतिक पक्षो तथा 99 देशोंको आमंत्रित किया था। यही बताती है कि परम धर्म संसद सभी को साथ लेकर चलना चाहती है। इससे विपरित vhp यह कहती है कि हमने धर्म संसद बुलाई है, सबके लिए खुली है , कोई भी आ जाओ। VHP बताए क्या मोहन भागवतजी अपने आप आ गए थे वहाँ? कि आमंत्रित किया था?? और आप चाहते है कि हिन्दुके सर्वोच्च धर्मगुरु अपने आप ही , बिना बुलाए वहां आ जाए? जहाँ न धर्म मर्यादा है न वैदिक विद्वान ? ◆ दूसरी बात जो भी सन्त समाज vhp के साथ है या नही भी उनको तो राजनीति में कोई पद की इच्छा भी हो सकती हैं । शंकराचार्यजी के पास तो राष्ट्रपति से भी ऊपर का पद है, इसलिए न तो उनको सरकारकी चापलूसी करने की आवश्यकता है, ना ही किसी राजनैतिक पार्टी का पक्ष लेने की। इससे विपरित अन्यान्य संत समाज को राजनीतिमें पद की इच्छा हो भी सकती है। ◆ कुछ दिशाहीन लोगो ने यह भ्रांति फैलाकर रखी है कि मोदी विरोध यानी हिन्दुविरोध। मोदी यानी हिंदुत्व। यह किस शास्त्र का वचन है??? मोदी का विरोध उनकी नीतियाँ और व्यवहार का विरोध है, न कि व्यक्ति विशेष का। जो सत्ता पर हो और धर्म विरुद्ध कार्य करे या उसके राज्य में धर्म ह्रास हो रहा है तो उसका विरोध करना ही चाहिए। परम धर्म संसद में केवल सनातन धर्म के पुनरोत्थान की चर्चा हुई। और इस मार्ग में जो बाधाए है उसका निवारण बताया गया। राम मन्दिर में 21-2-19 को शंकराचार्य स्वरूपानंदजी स्वयं वैदिक विधान से शीला न्यास करेंगे । आज तक वह सरकार पर विश्वास कर बैठे थे कि हिंदूवादी सरकार मंदिर बनाएगी। पर जब सरकार ने इस मुद्दे पर चुप्पी साध ली, न्यायालयों से केवल तारीख ही मिलती रही तब ये निर्णय हुआ। इससे विपरित vhp धर्म संसद में मंच से अध्यक्ष ने हम मोदी सरकार के साथ है , उनको वोट दो, इसके अतिरिक्त कोई धर्म की बात नही की। केवल और केवल मोदी सरकार की तारीफ ।जिस राम मन्दिर को लेकर यह सब ढोंग किया था उसको भी SC के निर्णय पर टाल दिया तब संतो ने विरोध प्रदर्शन किया और कहा तारीफ नही तारीख। जिसकी तस्वीरे और वीडियो मौजूद है। ◆ शंकराचार्य स्वरूपानंदजी ज्योतिषपीठ के प्रामाणित शंकराचार्यजी है। अयोध्या उनके धर्म अधिकार क्षेत्र (juridiction) में है, इस नाते वह राम मंदिर में पूजन कर सकते है। इस रूप से वे वहाँ जा ही सकते है। और इस देश का इतिहास रहा है कि सविनय कानून भंग कई बार हुआ है। कानून न्याय दिलाने के लिए ही है। Justice delays justice denies. 3-6-1989 चित्रकूट में भारत के चारो शंकराचार्य की उपस्थितिमे एक सम्मेलन हुआ , जिसमे रामजन्मभूमि पुनरुद्धार समिति का गठन हुआ। जिस समिति के शंकराचार्य स्वरूपानंदजी अध्यक्ष है, जो राम जन्मभूमि जिसे विवादित बताते है, उसमे एक पक्षकार है। जहाँ 7-5-1990 को राम मन्दिर में शिलान्यास का निर्णय हुआ। जिसके लिए शंकराचार्य स्वरूपानंदजी ने यात्रा निकाली थी, जिसमें उनकी गिरफ्तारी हुई। एक बात जो गौर करने लायक हौ कि निर्मोही अखाड़ा जो राम जन्मभूमि की पक्षकार है उसने मन्दिर निर्माण के तमाम अधिकार शंकराचार्यजी को दिए है। शंकराचार्यजी यश न ले जाए, उससे बौखलाकर 9-11-1989 को vhp ने राम जन्मभूमि मूल स्थान से 250 फीट कीदूरी पर, जो 67 एकड़ अविवादित भूमि भी नही है, ना ही रामजन्म भूमि है, उस पर शिलान्यास किया। और आज ये लोग प्रश्न उठा रहे है कि शंकराचार्यजी ने क्या किया?? आपने तो आरम्भ से ही विभाजन की नीति अपनाई है। जिस केस में vhp पक्षकार ही नही उसमे बोलती आई है कि मंदिर बनाएंगे। अच्छा है ।राम भक्तों को तो वह भी मान्य के आप vhp बनाओ। राम भक्त तो बनानेवाले के साथ ही है। पर अब बोल रहे है कि मन्दिर वही बनना चाहिए। अब सौगन्द कहा गई? अब तो राम राम के बदले मोदी मोदी?? !!😳😡 पहले बोल रहे थे राम मन्दिर अब बोलते है भव्य राम मन्दिर । सिर्फ शब्द बदलते रहते है। vhp , संघ, भाजपा के कार्यकर्ता , अमित शाह अब ये भी बोल रहे है कि मंदिर तो निर्माण हो ही गया है, अब तो केवल भव्य मंदिर बनाना है। इनको लाज भी नही आती, ढांचे को गिराया जिसमे राम लला बौठे थे, अब राम लला तंबू में आ गए 26 वर्ष से , और बोल रहे है मन्दिर निर्माण हो गया।!!?? SC के निर्णय की प्रतीक्षा करेंगे?? तो कोठारी बंधू को क्यों मरवाया?? कार सेवको को क्यों उकसाया? उस समय राह देख लेते जब सत्ता में bjp नही थी। सरयू के ऊपर छत नही है, डूब मरो। अब कारसेवको के बलिदान को भूल गए?? मुलायम धूर्त ने गोली चलवाई और आपने गोली खाने के लिए भेजा। गोरक्षा में इंदिरा गांधी ने हत्याए करवाई । सभी पार्टियां एक जैेसी ही है। हत्यारो बंध करो राजनीति। मन्दिर तो बनेगा ही। हम सभी हिन्दू शंकराचार्यजी के साथ मिलकर बनाएंगे। 1 मई 1990 में जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी महाराज अपने अनेक शिष्यों के साथ राम मन्दिर के लिए जेल गए। उन्हें पुलिस ने चुनार के किले में जेल बनाकर तब बन्द कर दिया जब जगतगुरु 7 मई 1990 को शिलान्यास करने के लिए अयोध्या जा रहे थें। चुनार के किले में उन्हें 9 दिन लगातार टार्चर किया गया और कहा गया कि आप उत्तर प्रदेश छोड़ कर चले जाइये पर शंकराचार्य जी ने साफ कहा कि मैं किसी के कहने से नही चलता। मैं पूरे देश मे अपनी इच्छा से कही आता हूँ और कही भी जाता हूँ। जब पूरे देश मे शंकराचार्य जी को जेल में बंद करने का विरोध बढ़ा तब शंकराचार्य जी को सरकार ने माफी मांगते हुए छोड़ दिया था। यही नही शंकराचार्य जी ने राम मन्दिर पुनरोद्धार समिति बनाकर कोर्ट में राम मन्दिर के लिए केस लड़ा और सबसे मजबूत तथ्य रखा जिसके कारण कोर्ट ने ये माना कि वो राम मन्दिर ही था। 90 दिन में 21 दिन इलाहाबाद हाई कोर्ट ने केवल जगतगुरु शंकराचार्य जी के पक्ष को सुना तब जाकर यह सिद्ध हुआ कि वो मन्दिर ही था और बाबर ने कभी अयोध्या या उसके सिपहसलार मीर बाकी ने कभी अयोध्या गया ही नही और इस प्रकार से यह सिद्ध हुआ की वह विवादित ढाँचा सदैव से राम मन्दिर ही था। : अब रही विश्व हिन्दू परिषद की बात, तो आजतक विश्व हिन्दू परिषद का कोई नेता राम मन्दिर के लिए जेल कभी नही गया। बल्कि सामान्य कारसेवको के लाश पर रोटियाँ सेक कर सत्ता सुख ये जरूर भोगते रहें। विश्व हिन्दू परिषद ने राम मन्दिर के नाम राम जन्म भूमि न्यास बनाकर खूब आंदोलन करके हजारो करोड़ रुपये इकट्ठा किये और आजतक उस पैसे को खा रहे हैं पर कभी भी कोर्ट में ये पक्षकार नही बने। यदि बने हो तो मुझे कोई विहिप का कार्यकर्ता सबूत दिखा सकता है। : हिन्दुओं आपको पता है आज यह लोग शंकराचार्य को कांग्रेसी कहते हैं पर एक समय था जब जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी महाराज को भाजपाई कहा जाता था अभी आपको ऐसे अनेक फोटो मिल जाएंगे और आज भी भाजपा के बहुत सारे नेता उनकी आरती पूजा करते हैं। संघ के मोहन भागवत खुद आ करके उनके चरणों मे बैठ चुके हैं।...... जब विश्व हिंदू परिषद ने राम जन्म भूमि की शिलान्यास किया तो वह शिलान्यास शास्त्रीय विधि से नहीं था और मूल गर्भ गृह के स्थान पर नहीं था जिसका विरोध शंकराचार्य जी ने किया था, और इस बात का जब जनता में विरोध हुआ तब विश्व हिन्दू परिषद ने पैतरा बदलते हुए कहना शुरू कर दिया कि नही नही वो राम मन्दिर का नही बल्कि सिंह द्वार का शिलान्यास किया है फिर जब शंकराचार्य जी ने कहा कि किसी भी मन्दिर में पहले गर्भ गृह का शिलान्यास होता है ना कि सिंह द्वार का और इस प्रकार जब विश्व हिन्दू परिषद के पाखण्ड का शंकराचार्य जी ने शास्त्रों से खण्डन कर दिया तभी से इस बात से चिढ़कर के उन लोगों ने शंकराचार्य जी को कांग्रेसी कहना शुरू कर दिया और वह आज तक कहते हैं जबकि शंकराचार्य जी किसी पार्टी के नहीं है उनके यहां आपको सभी पार्टी के लोग आकर के आशीर्वाद लेते हुए दिख जाएंगे खुद मोहन भागवत भी उनके चरणों में बैठे हुए फोटो में दिख जाएंगे। मैं कुछ पत्र संलग्न कर रहा हूं अतः आप उसे अवश्य पढ़िए और देखिए कि वास्तविकता क्या हुआ था मीडिया ने और कभी भी विश्व हिंदू परिषद ने सच्चाई को बाहर आने ही नहीं दिया जबकि शंकराचार्य जी ने अपने द्वारा किए हुए कार्यों का कभी प्रचार-प्रसार किए नहीं पर अब हम जैसे सामान्य नागरिकों ने यह तय कर लिया है कि किसी बात को छुपने नहीं देंगे। शंकराचार्य जी से जुड़ कर के उनके द्वारा किए गए समस्त कार्यों का प्रचार हम स्वयं करेंगे जिससे कि जनता को सच्चाई पता चले और यह पता चले कि उनके जगतगुरु शंकराचार्य उनके लिए कितना समर्पित है। आप लोग संलग्न पत्र अवश्य पढ़ें। राम सनातनी

Comments

Popular posts from this blog

जगद्गुरु  शंकराचार्य निश्चालानंद सरस्वती परिचय

शंकराचार्य स्वामी श्री अविमुक्तेश्वरानंद द्धारा राम मंदिर के लिए दिया गया महत्वपूर्ण प्रमाण

शंकराचार्य ने राम मंदिर कैसे प्राप्त किया