हम हिन्दुओं के पूज्य वर्तमान हमारे पूज्य भविष्य का निर्माण करते हुए

★★हम हिन्दुओं के पूज्य वर्तमान हमारे पूज्य भविष्य का निर्माण करते हुए★★ अहा! यह तस्वीरें देख कर कितना आनंद आ रहा है। गुरुदेव की क्लास लगी है। ऐसे समझों महादेव स्वयं क्लास ले रहे हैं और देवता गण कॉपी पेन लेकर गुरु के एक वचनों को सदैव के लिए लिख कर रख लेना चाहते हों। इस कक्षा में कोई सामान्य विषय नही चल रहा है। इस कक्षा में ब्रह्मसूत्र भाष्य की पढ़ाई चल रही है। देखो दुनिया के लोगों। कैसे हमारे गुरुओं ने सनातन धर्म को बचाया है? सनातनधर्म इन पूज्य गुरुचरणों के त्याग तपस्या से बचा है ना कि हिन्दू हिन्दू चिल्लाते रहने से बचा है। इसी को कहते हैं परम्परा जहाँ हमारे 98 वर्ष के आचार्य भी 60-70 वर्ष के शिष्यों को अपने पास बैठा कर पढ़ाते हैं। इस परंपरा में भोजपत्र और दवात स्याही वाली लेखनी के स्थान पर कॉपी और पेन ही बदला है बाकी सब वही है। वैसे गुरु सदैव गुरु होते हैं वो आयु के साथ कभी रिटायर नही होते। हमारे गुरु जानते हैं कि कल को उनके बाद भी मानव जाति के कल्याण का, मोक्ष का राह दिखाने वाला होना चाहिए इसलिए वो अपनी तपस्या से प्राप्त अपना सारा ज्ञान अपनी सारी विद्या अपने शिष्यों में उड़ेल देना चाहते हैं इसलिए अपने पास बैठाकर सीखा पढ़ा रहे हैं। यह गुरुदेव की तपस्या ही है कि भारी भरकर शरीर के साथ भी एक आसन में घण्टो बैठकर अपने शिष्यों को सनातन धर्म की सबसे कठिन विद्याएं पढ़ा रहे हैं। अन्यथा 98 वर्ष की आयु क्या होती है आज दुनिया के अधिकांश लोग कल्पना भी नही कर सकते और कर भी नही पायेंगे क्योंकि 98 तक पहुँच ही कितने पाते हैं? हमने देखा है 70-80 की आयु के बुजुर्गों को जो दिनभर खटिया पर पड़े रहते हैं। जो लोग भगवान् शंकराचार्य को सामान्य शरीरधारी मनुष्य समझते हैं उनके विनाश से भला उन्हें कौन बचा सकेगा?? मैंने बहुतों को देखा और सुना है कि दूर से तो बहुत अनर्गल बातें लोग करते हैं पर पास जाकर कभी इनके सामने बोलने की हिम्मत नही होती क्योंकि उन्हें भी पता है कि पास जाने पर सिद्ध हो जाएगा कि वो कितना पानी मे हैं। शंकराचार्य जी का तो छोड़िए कोई उनके शिष्यों के सामने ही जाकर अपना ज्ञान दिखा दे तो पता चल जाएगा। वर्णाश्रम विरोधी धर्म विरोधी संघी भाजपायी वामपंथी मीडिया, शोसल मीडिया के द्वारा हमारे आचार्यों की बनाई गई गलत छवि को लेकर जो लोग इनसे दूर हो जाते हैं वो समझो अपने जीवन की दिशा किधर मोड़ लेते होंगे? हमे गर्व है कि हम उस काल मे धरती पर जन्म लिए जहाँ हमे ऐसे साक्षात शिव स्वरूप आचार्य के दर्शन सुलभ हैं। जगद्गुरु शंकराचार्य भगवान् की जय नोट:- शंकराचार्य जी और उनकी परम्परा से सम्बन्धित लेख पढ़ने के लिए आपसब हमे फॉलो करें। ✍️दीपक कुमार केशरी #सनातनी

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